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बस्ती: आगजनी के ‘सौदागर’ धरे गए; हिस्ट्रीशीटर किशन यादव गैंग का दुस्साहस पड़ा भारी!

बस्ती: आगजनी के 'सौदागर' धरे गए; हिस्ट्रीशीटर किशन यादव गैंग का दुस्साहस पड़ा भारी!

अजीत मिश्रा (खोजी)

🚨बस्ती: लालगंज में सरेराह आगजनी करने वाले तीन गिरफ्तार, मुख्य आरोपी निकला हिस्ट्रीशीटर🚨

⭐सावधान! बस्ती में आग से खेलने वालों का हुआ ये हश्र; 6 मुकदमों वाला शातिर अपराधी अब पुलिस की गिरफ्त में।

⭐बाजार जलाने की साजिश नाकाम: लालगंज पुलिस ने दबोचे 3 उपद्रवी, मुख्य आरोपी निकला पुराना पापी।

बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।

बस्ती। कानून के इकबाल को चुनौती देने वाले और लालगंज बाजार की दुकानों को आग के हवाले करने वाले तीन शातिर अभियुक्तों को पुलिस ने धर दबोचा है। लालगंज पुलिस टीम ने गुरुवार को घेराबंदी कर इन ‘अराजक तत्वों’ को गिरफ्तार किया, जिन्होंने न केवल बाजार की शांति भंग की थी, बल्कि व्यापारियों की मेहनत की कमाई को भी राख में मिलाने का दुस्साहस किया था।

💫बाजार में दहशत फैलाने की रची थी साजिश

पुलिस के अनुसार, लालगंज बाजार में दुकानों में आग लगाने की घटना को लेकर स्थानीय थाने में मु0अ0सं0 61/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2) और 326(g) के तहत मामला दर्ज था। पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर ग्राम बखरिया बगिया के पास से तीनों अभियुक्तों को उस समय दबोच लिया, जब वे भागने की फिराक में थे।

📢गिरफ्तार अभियुक्तों का कच्चा चिट्ठा

पकड़े गए आरोपियों में एक शातिर अपराधी और दो युवा शामिल हैं, जो अपराध की अंधी राह पर चल पड़े हैं:

👉किशन यादव उर्फ संदीप यादव (35 वर्ष): मुख्य अभियुक्त, निवासी लालगंज।

👉अमन उपाध्याय उर्फ अवनीश कुमार (19 वर्ष): निवासी बरतनिया, लालगंज।

👉सोहन लाल (18 वर्ष): निवासी जामडीह पाण्डेय, कोतवाली बस्ती।

💫हिस्ट्रीशीटर है गैंग का सरगना किशन यादव

हैरानी की बात यह है कि मुख्य अभियुक्त किशन यादव एक आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ लालगंज थाने में पहले से ही आधा दर्जन गंभीर मामले दर्ज हैं। उसका आपराधिक इतिहास डराने वाला है:

👉वर्ष 2018 से ही उस पर मारपीट, धमकी और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने (IPC 406, 506 आदि) के मामले दर्ज हैं।

👉वर्ष 2020 और 2021 में वह आयुध अधिनियम (Arms Act) के तहत जेल जा चुका है।

👉उसकी दबंगई का आलम यह है कि उस पर उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम (UP Gunda Act) की धारा 10 के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है।

बावजूद इसके, सुधारने के बजाय उसने इस बार आगजनी जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देकर पूरे इलाके को दहलाने की कोशिश की।

💫अपराध का ‘प्रोफेशनल’ खिलाड़ी है किशन यादव

हैरानी की बात यह है कि मुख्य अभियुक्त किशन यादव उर्फ संदीप यादव कोई नौसिखिया नहीं, बल्कि लालगंज पुलिस के रिकॉर्ड में एक शातिर हिस्ट्रीशीटर है।

👉उस पर यूपी गुंडा एक्ट (धारा 10) लग चुका है।

👉अवैध हथियारों (Arms Act) का पुराना शौकीन है।

👉मारपीट, धमकी और संपत्ति हड़पने के 6 से ज्यादा गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं।

सवाल यह है: क्या गुंडा एक्ट की कार्रवाई के बाद भी किशन यादव का खौफ कम नहीं हुआ था? इस बार उसने आगजनी का सहारा लेकर बस्ती पुलिस के इकबाल को चुनौती दी थी, जिसका जवाब पुलिस ने उसे सलाखों के पीछे भेजकर दिया है।

💫पुलिस का सख्त संदेश: “बख्शे नहीं जाएंगे अपराधी”

थाना प्रभारी विनय कुमार पाठक के नेतृत्व वाली टीम ने साफ कर दिया है कि बाजार की शांति भंग करने वालों के साथ कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पकड़े गए अन्य दो युवक—अमन उपाध्याय (19) और सोहन लाल (18)—भी इसी शातिर अपराधी के बहकावे में आकर अपराध की दलदल में उतरे थे।

“अपराधियों की जगह या तो जेल है या फिर समाज से बाहर। लालगंज की जनता और व्यापारियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। आगजनी जैसे जघन्य कृत्य करने वालों के खिलाफ ऐसी मिसाल पेश की जाएगी कि दोबारा कोई ऐसी जुर्रत न करे।” > — (संभावित पुलिस वक्तव्य)

💫न्यायालय रवाना, अब सजा की बारी

गिरफ्तार किए गए तीनों अभियुक्तों—किशन यादव, अमन उपाध्याय और सोहन लाल—को आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद माननीय न्यायालय जनपद बस्ती के लिए रवाना कर दिया गया है। लालगंज बाजार के व्यापारियों ने पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई पर संतोष जताया है, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है—क्या इन अपराधियों को उनके किए की कड़ी सजा मिलेगी?

💫पुलिस टीम की मुस्तैदी

इस सफलता में लालगंज थाना प्रभारी विनय कुमार पाठक, निरीक्षक राजेश विश्वकर्मा और उप-निरीक्षक अनन्त कुमार मिश्र सहित कांस्टेबल अर्जुन, वंशराज यादव और पवन यादव की अहम भूमिका रही। पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अपराधियों की जगह बाजार में नहीं, बल्कि सलाखों के पीछे है।

तीखा सवाल: क्या किशन यादव जैसे हिस्ट्रीशीटरों के लिए जेल का दरवाजा ‘आने-जाने’ का रास्ता बन गया है? पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब जनता की नजरें न्यायालय पर टिकी हैं कि इन “आगजनी के सौदागरों” को उनके किए की कड़ी सजा कब मिलती है।

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